खेती में चूहों की समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। ये न सिर्फ फसलों को कुतरकर नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि खेत की मेड़ों और मिट्टी की संरचना को भी खराब कर देते हैं। कई बार किसान इन्हें खत्म करने के लिए जहरीले केमिकल का सहारा लेते हैं, लेकिन इससे मिट्टी और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ सकता है।
यहां कुछ ऐसे आसान और प्राकृतिक तरीके बताए जा रहे हैं, जिनसे बिना चूहों को नुकसान पहुंचाए आप उन्हें खेत से दूर रख सकते हैं। खास बात यह है कि इन उपायों में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर चीजें घर पर ही मिल जाती हैं।
सबसे पहला और असरदार तरीका है चूहों के बिलों में धुआं करना। इसके लिए गोबर के उपले जलाएं और उसमें नीम की सूखी या हरी पत्तियां डाल दें। नीम के धुएं की तेज गंध चूहों के लिए असहनीय होती है, जिससे उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है और वे बिल छोड़कर भाग जाते हैं।
दूसरा उपाय है फिनाइल का इस्तेमाल। फिनाइल की तीखी महक चूहों को बिल्कुल पसंद नहीं होती। आप रूई को फिनाइल में भिगोकर चूहों के बिल के मुहाने पर रख दें। इसकी गंध के कारण चूहे उस रास्ते से दोबारा अंदर आने से बचते हैं।
तीसरा और काफी प्रभावी नुस्खा है कपूर का प्रयोग। कपूर की टिक्की को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर बिलों के पास रख दें। इसकी तेज सुगंध चूहों को दूर रखने में मदद करती है। कई लोग मानते हैं कि इससे खेत के आसपास अन्य हानिकारक जीव भी कम दिखाई देते हैं।
इसके अलावा, आप नीम के तेल और लहसुन के रस का मिश्रण भी तैयार कर सकते हैं। लहसुन को पीसकर उसका रस निकालें और उसमें नीम का तेल मिलाएं। इस मिश्रण में रूई भिगोकर बिलों के पास रखें। इसकी गंध चूहों को उस जगह से दूर रहने पर मजबूर कर देती है।
इन घरेलू उपायों के साथ खेत की नियमित सफाई भी बेहद जरूरी है। मेड़ों पर उगी बेकार घास और झाड़ियों को हटाते रहें, क्योंकि ऐसी जगहें चूहों के छिपने के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं। सिंचाई के समय चूहों के बिलों में पानी भर देना भी एक सरल उपाय है, जिससे वे वहां से पलायन कर जाते हैं।
ये सभी तरीके प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल हैं। इनसे फसल, मिट्टी या आसपास के जीव-जंतुओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, और किसान बिना अतिरिक्त खर्च के चूहों की समस्या से राहत पा सकते हैं।



