गेहूं की खेती में अंतिम सिंचाई का समय और तरीका बेहद महत्वपूर्ण होता है। पूरे सीजन की मेहनत का नतीजा इसी पर निर्भर करता है। कई बार किसान अनजाने में कुछ गंभीर गलतियां कर देते हैं, जिससे फसल गिर जाती है या दाने पतले और हल्के रह जाते हैं। ऐसे में उत्पादन 40–50% तक घट सकता है।
आखिरी सिंचाई का सही समय पहचानने के लिए बाली को हल्का सा छीलकर दाने को दबाकर देखें। अगर दाने से दूध जैसा रस निकले और वह आटे की लुगदी (डो स्टेज) जैसा महसूस हो, तो समझ लें कि पानी देने का यही सही समय है। इसके अलावा, जब पौधे के नीचे और बीच के पत्ते पीले पड़ने लगें, तो यह भी संकेत है कि अब अंतिम सिंचाई करनी चाहिए।
इन 3 बड़ी गलतियों से रहें सावधान
1. आखिरी पानी के साथ यूरिया का प्रयोग
कई किसान सोचते हैं कि अंतिम सिंचाई के साथ यूरिया डालने से उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन यह बड़ी भूल साबित हो सकती है। इस समय तक जड़ें कमजोर हो चुकी होती हैं और नाइट्रोजन सही ढंग से अवशोषित नहीं कर पातीं। यूरिया डालने से मिट्टी में अतिरिक्त गर्मी पैदा होती है, जिससे दाने समय से पहले सूख सकते हैं और पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ता है।
2. सिंचाई में बहुत देरी या बहुत जल्दी पानी देना
अगर आप फसल गिरने के डर से पानी देने में देरी करते हैं, तो दानों को पकने के लिए जरूरी नमी नहीं मिलती। वहीं, बहुत जल्दी पानी देने से भी बाद में नमी की कमी हो सकती है। दोनों ही स्थितियों में दाने छोटे, हल्के और कम वजन वाले रह जाते हैं, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन घट जाता है।
3. तेज हवा के दौरान सिंचाई करना
तेज हवा में पानी देना फसल गिरने (लॉजिंग) का बड़ा कारण है। जब बालियां दानों से भर जाती हैं, तो उनका वजन बढ़ जाता है। ऐसे समय में यदि मिट्टी गीली हो और हवा तेज चले, तो कमजोर जड़ें पौधे को संभाल नहीं पातीं और फसल गिर जाती है। जमीन पर गिरी फसल के दाने जल्दी पक जाते हैं और उनमें मोटाई व चमक नहीं आ पाती।
बचाव के आसान उपाय
- सिंचाई से पहले मौसम और हवा की रफ्तार पर ध्यान दें।
- अगर दिन में हवा तेज हो, तो रात के समय पानी देना बेहतर रहता है।
- खेत में पानी भराव न होने दें, सिर्फ उतनी ही सिंचाई करें जिससे जड़ों तक पर्याप्त नमी पहुंच सके।
इन बातों का ध्यान रखकर आप गेहूं के दानों को मोटा, चमकदार और वजनदार बना सकते हैं। सही समय पर सही तरीके से आखिरी सिंचाई करने से पैदावार बेहतर होगी और मुनाफा भी बढ़ेगा।



